एनटीडी में शामिल बीमारियों से हर साल हजारों लोगों की मौत: – वीबीडीएस 

  • एनडीटी दिवस की पूर्व संध्या पर कपिलदेव तिवारी बालिका उच्च विद्यालय, कोरानसराय में संगोष्ठी का आयोजन
  •  स्कूली छात्राओं को दी गई एनटीडी से जुड़ी बीमारियों की जानकारी

बीआरएन बक्सर।  विश्व एनटीडी (नेगलेक्टेड ट्रॉपिकल डिजीज) दिवस की पूर्व संध्या पर जिले के डुमरांव प्रखंड स्थित कोरान सराय के कपिलदेव तिवारी बालिका उच्च विद्यालय में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस क्रम में कोरानसराय अंतर्गत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के माध्यम से गठित पेशेंट स्टेक होल्डर प्लेटफार्म (पीएसपी) के सदस्यों के माध्यम से छात्राओं को एनटीडी में शामिल बीमारियों की जानकारी दी गई।

इस दौरान कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डुमरांव प्रखंड के वेक्टर जनित रोग सुपरवाइजर अभिषेक सिन्हा ने छात्राओं को एनटीडी के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि विश्व उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग (नेग्लेक्टेड ट्रॉपिकल डिजीज) को एनटीडी रोग कहा जाता है। जिसमें लिम्फैटिक फाइलेरिया (हाथीपांव), कालाजार, कुष्ठ, डेंगू, चिकुनगुनिया, सर्पदंश, हाइडेटिडोसिस, रेबीज जैसे कुल 20 रोगों को शामिल किया है। जिनकी रोकथाम संभव है। एनडीटी जीवन को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करने वाली बीमारियों का समूह है, जो सबसे अधिक गरीब व कमजोर आबादी को प्रभावित करता है। हालांकि, इन रोगों का रोकथाम संभव है, लेकिन फिर भी पूरी दुनिया में इन गंभीर बीमारियों से हर साल लोगों की या तो मौत हो जाती है या फिर वे विकलांग हो जाते हैं। जिसको देखते हुए पूरे विश्व के लोगों को जागरूक करने के लिए यह दिवस मनाने का निर्णय लिया गया।

एनटीडी को लेकर सरकार और स्वास्थ्य विभाग सतर्क : 

वीबीडीएस अभिषेक सिन्हा ने बताया कि एनटीडी में शामिल बीमारियां वायरस, बैक्टीरिया, पैरासाइट फंगस और टॉक्सिन से होती हैं। जिसमें फाइलेरिया, डेंगू और कालाजार को लेकर सरकार और स्वास्थ्य विभाग सतर्क है। जिस प्रकार लगातार प्रयासों से हमने चेचक को खत्म कर दिया है। ठीक उसी प्रकार हम सभी मिलकर एनटीडी में शामिल बीमारियों को भी खत्म कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि अमूमन देखा जाता है कि इन बीमारियों के प्रति समुदाय जागरूक नहीं है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों को मजबूती देने के लिए अब सभी वर्गों के लोगों जागरूकता दिखानी होगी। इन रोगों में लक्षणों की पहचान बेहद जरूरी है, यदि समय से मरीजों में इन रोगों की पहचान कर उनका इलाज शुरू किया जाए तो वह स्वस्थ हो जाएंगे। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि अगर किसी मरीज को इन बीमारियों के लक्षण दिखे तो तत्काल अपने क्षेत्र की आशा को इसकी जानकारी दें और सरकारी अस्पताल में दिखाएं। ताकि, समय से इलाज करा कर इन बीमारी पर काबू पाया जा सकता है।

    ज्यादातर बीमारियां फैलाते हैं मच्छर :

वहीं, संगोष्ठी में शामिल सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च के जिला समन्वयक आशीष पांडेय ने बताया कि एनटीडी में शामिल ज़्यादातर बीमारियां मच्छरों के काटने से होती हैं। जिनमें अलग अलग प्रजातियों के मच्छरों के द्वारा फाइलेरिया, डेंगू और कालाजार प्रमुख हैं। हालांकि, सरकार इन बीमारियों की रोकथाम के लिए अलग अलग कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। जिसके तहत फाइलेरिया उन्मूलन के लिए सर्वजन दवा सेवन (एमडीएम) कार्यक्रम चलाया जाता है। जिसमें आशा कार्यकर्ताओं के द्वारा घर घर जाकर योग्य लाभुकों को दवाएं खिलाई जाती है। इसलिए यह हम सबकी जिम्मेदारी होती है कि एमडीए अभियान के दौरान सभी अपने उम्र के अनुसार इन दवाओं का सेवन करें और अपने परिवार और समाज को फाइलेरिया से मुक्त बनाने में अपना सहयोग दें। उन्होंने आगे बताया कि कालाजार और डेंगू उन्मूलन के लिए सरकार द्वारा अभियान चलाया जाता है, जिसमें प्रभावित गांव में क्रमशः एसपी पाउडर और डीडीटी का छिड़काव कराया जाता है। इसलिए मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए घर व आसपास साफ-सफाई रखना बेहद आवश्यक है। जलजमाव ना होने दें। सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें और पूरे आस्तीन के कपड़े पहनें। इसके प्रति जन जागरूकता को बढ़ावा देकर भी इन बीमारियों से बचा जा सकता है। इस दौरान कोरान सराय एचडब्ल्यूसी की आशा कार्यकर्ताएं भी छात्राओं से मुखातिब हुईं।

मौके पर विद्यालय के प्राचार्य रघुवेंद्र नारायण तिवारी, शिक्षक सुनील कुमार, सहायक शिक्षक धन्यजय कुमार, लिपिक निर्मल कुमार, आशा फैसिलिटेटर उर्मिला देवी, आशा कार्यकर्ताओं में पूनम देवी, चंदा कुमारी, ललिता देवी, प्रेमशिला देवी, सुजाता देवी, विद्यावती देवी व सोनी कुमारी के अलावा सीएफएआर के सीनियर प्रोजेक्ट एसोसिएट अमित सिंह तथा स्कूल के गैर शिक्षण कर्मचारी और छात्राएं शामिल रही।

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