पप्पू आलम की रिपोर्ट
Supoul:पुलिस का काम सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण माना जाता है नागरिक सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं के कंधे पर होती है, सत्य के साथ खड़ा होने वाले अफसरों का सरकार भी कभी अपेक्षित साथ नहीं देती है, यह स्थिति सच में अत्यंत ही गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण है. ईमानदार अफसरों को जीवन भर भटकना ही पड़ता है. उन्हें भ्रष्ट राजनेताओं और उच्चाधिकारियों द्वारा प्रमोशन से अकारण वंचित किया जाता है. साथ ही ट्रांसफर की तलवार तो उन पर हमेशा लटकी ही रहती है. जिसका जीता जागता उदाहरण सुपौल जिले की जदिया थाना में देखने को मिल रही है, जदिया थाना में स्थापित महिला हेल्प डेस्क प्रभारी रिंकी कुमारी ईमानदार पदाधिकारी के रूप में जाने जाते हैं, दलाल, बिचौलिए ,माफिया अवैध कारोबारी को इनकी कार्रवाई से हड़कंप रहती हैं, इनकी कार्यशैली कुछ लोगों को पसंद नहीं आ रही है, यही वजह है कि इन दिनों उन्हें मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है, रिंकी कुमारी की ईमानदारी से की जा रही निरन्तर कर्यवाही को देखकर क्षेत्र के लोगो व बुद्धिजीवियों का कहना है कि रिंकी कुमारी को अगर किसी थाने की थाना अध्यक्ष का जिम्मा सौंपा जाए ,तो आने वाले समय में निश्चित ही यह मील का पत्थर साबित होगा, क्योंकि; वे रिश्वत खोर अफसर नहीं है. और, क्योंकि वे सच के साथ हमेशा खड़े होते हैं. दरअसल कड़वी दवा और कड़क ईमानदार अफसर को कम ही लोग पसंद करते हैं. क्योंकि, वे उलटे-सीधे काम नहीं करते. सभी को बिकने वाले सरकारी बाबू ही चाहिये जो उनके हिसाब से मनमुताबिक काम करे. भले ही वह राज्यहित में न हो. जबकि दोहरे चरित्र और सरकारी दामाद जैसे रूल में दौड़ रहे लोग किसी ना किसी से तालमेल बैठा कर काम निकल लेते हैं और तो और जहां पेचकस रूपयों की होती है उससे भी काम चला लेते हैं ! संदेह और अविश्वास प्रभाव से ज्यादा होने लगता है तो अधिकांश लोग व्यवस्था पर विश्वास नहीं करते, तो एक ईमानदार अधिकारी की सत्यनिष्ठा पर भी सवाल उठाए जाते हैं ! उसे बार-बार साबित करना पड़ता है कि वह बाकियों से अलग है ! घोर कलयुग जहां ईमानदारी की पर्चे भरे जाते हैं और मीडिया में ढिंढोरा पिटा जाता है, इससे पूर्व लौकहा थाने में थाना अध्यक्ष के पद पर तैनात निधि गुप्ता को बड़ी मुसीबत की सामना करना पड़ा ,आपराधिक गतिविधियों को रोकने, तथा मारपीट, लूट हत्या, अपराधियों को पकड़ने, अपराधियों के द्वारा किये जाने वाले अपराधों की खोजबीन करने, देश की आंतरिक सम्पत्ति की रक्षा करने और जो अपराधी हैं और उनका अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य जुटाना ही पुलिस का कार्य है। इसी में सूचना की सत्यापन करने पहुंची निधि गुप्ता को मार भी खाना पड़ा उसके थाना अध्यक्ष की कुर्सी को भी गबानी पड़ी, जबकि उनकी गलती थी सिविल में जल्दी बाजी पहुंची थी, ताकि वहां पर कोई अनहोनी की घटना ना हो,उन्होंने जल्दी स्थल पर पहुंचना मुनासिब समझा, वर्दी पहनने में विलम्ब हो सकती थी, नहीं जाते तो पर भी कार्रवाई, गये तो पर भी कार्रवाई, जबकि निधि गुप्ता ईमानदार पदाधिकारी के रूप में जाने जाते थे, लोगों ने बताया सुशासन के सरकार में ईमानदार पदाधिकारी को इसी तरह से दबोचा जा रहा है ताकि वह ईमानदारी से कार्य नहीं कर सके, ऐसे में ईमानदार पदाधिकारी का मनोबल टूटती है, वरीय अधिकारी भी ईमानदार पुलिस पदाधिकारी को सहयोग देने में बिफल हो रही है जिसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।